
रांची: झारखंड से राज्यसभा की दो सीटों के लिए होने वाले चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। निर्वाचन कार्यक्रम घोषित होने के बाद अब सबसे अधिक चर्चा महागठबंधन के भीतर सीटों के बंटवारे और उम्मीदवारों के चयन को लेकर हो रही है। इस बीच कांग्रेस ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि वह राज्यसभा की एक सीट पर अपना दावा छोड़ने के मूड में नहीं है।
प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व का कहना है कि गठबंधन की सहयोगी पार्टी होने के नाते कांग्रेस को राज्यसभा में प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। पार्टी नेताओं का मानना है कि विधानसभा में मौजूद संख्या बल और गठबंधन में उसकी भूमिका को देखते हुए एक सीट कांग्रेस के खाते में जाना स्वाभाविक है। हालांकि अंतिम निर्णय महागठबंधन के शीर्ष नेताओं द्वारा आपसी सहमति से लिया जाएगा।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने भी सार्वजनिक रूप से यह राय रखी है कि गठबंधन की मजबूती बनाए रखने के लिए सभी सहयोगी दलों को उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। नेताओं का कहना है कि झामुमो, कांग्रेस, राजद और वाम दलों की एकजुटता ही राज्यसभा चुनाव में महागठबंधन की सबसे बड़ी ताकत है।
विधानसभा में क्या कहता है आंकड़ा?
झारखंड विधानसभा की वर्तमान स्थिति पर नजर डालें तो महागठबंधन मजबूत स्थिति में दिखाई देता है। विधानसभा में गठबंधन के पास बहुमत से कहीं अधिक विधायक हैं, जिससे दोनों सीटों पर उसकी दावेदारी मजबूत मानी जा रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि गठबंधन के सभी विधायक एकजुट रहते हैं तो राज्यसभा की दोनों सीटें उसके खाते में जा सकती हैं।
दूसरी ओर विपक्षी एनडीए के पास संख्या बल अपेक्षाकृत कम है। ऐसे में उसके लिए राज्यसभा चुनाव में चुनौतीपूर्ण स्थिति बनी हुई है। हालांकि चुनावी राजनीति में रणनीति और समीकरण अंतिम समय तक बदलते रहते हैं, इसलिए सभी दल अपने-अपने स्तर पर तैयारी में जुटे हैं।
उम्मीदवारों को लेकर बढ़ी उत्सुकता
राज्यसभा चुनाव की तारीख नजदीक आने के साथ ही संभावित उम्मीदवारों के नामों को लेकर अटकलों का दौर भी शुरू हो गया है। राजनीतिक गलियारों में कई नामों की चर्चा है, लेकिन अब तक किसी भी दल की ओर से आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
फिलहाल सबकी निगाहें महागठबंधन के शीर्ष नेतृत्व पर टिकी हैं, जहां यह तय होना है कि दोनों सीटों पर कौन-कौन उम्मीदवार मैदान में उतरेंगे और सहयोगी दलों के बीच सीटों का अंतिम फार्मूला क्या होगा।















